ओवरी के बढ़ाने से क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Sat 3rd Dec 2022 : 17:29

ओवरी के साइज का संबंध महिला के आसानी से गर्भधारण करने की क्षमता से होता है। अंडों के फर्टिलाइज होने की क्षमता भी ओवरी के साइज पर ही निर्भर करती है। अगर अंडाशय का साइज नॉर्मल से कम है तो उन्‍हें गर्भधारण करने में दिक्‍कत आ सकती है क्‍योंकि इसका एग रिजर्व सामान्‍य से कम होगा।

ओवरी का आकार कई कारणों से बदलता है। यौवन (पुबर्टी) की उम्र में पहुंचने से पहले और मेनोपॉज आने के बाद ओवरी का आकार छोटा होता है। उम्र के अलावा, दूसरे भी ऐसे अनेक कारक हैं जो ओवरी के आकार को प्रभावित करते हैं।

प्रजनन उपचार और प्रेगनेंसी के दौरान एवं अंडाशय से जुड़े विकारों के कारण ओवरी के आकार में बदलाव आता है। ओवरी के आकार का संबंध सीधा महिला के गर्भधारण करने की क्षमता से होता है। अंडों के फर्टिलाइज होने की क्षमता भी ओवरी के आकार पर निर्भर करता है।

अगर ओवरी का आकार सामान्य से कम है तो महिला को गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है, क्योंकि इस स्थिति में अंडा रिजर्व सामान्य से कम होता है। अल्ट्रासाउंड और खून की जांच से ओवरी के आकार की पुष्टि की जा सकती है।

अल्ट्रासाउंड से ओवरी में फॉलिकल की संख्या को गिना जा सकता है। फॉलिकल की संख्या से पता चल सकता है कि एग रिजर्व कम है या सामान्य। ओवरी का आकार बड़ा होने का मतलब यह नहीं है की एग रिजर्व अधिक है।

विकार या ट्यूमर के कारण ओवरी का आकार बढ़ सकता है। इस स्थिति में महिला सामान्य रूप से ओवुलेट नहीं करती है। साथ ही, गर्भधारण करने में परेशानी होती है। अगर आपको प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श करें।

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